बड़ी खबर, रैनबैक्सी (Ranbaxy) का मालिक गिरफ्तार !!

दिल्ली पुलिस ने रैनबैक्सी (Ranbaxy) के Ex-Promoter (भूतपूर्व प्रमोटर या मालिक) शिवेन्दर सिंह (shivinder Singh) और रेलिगेयर (religare) के भूतपूर्व चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (Ex-CMD) सुनील गोढवानी (Sunil Godhwani) को वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार कर लिया है ।

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Shivinder Singh
Shivinder singh

अभी अभी एक बड़ी खबर आ रही है की दिल्ली पुलिस ने रैनबैक्सी (Ranbaxy) के Ex-Promoter (भूतपूर्व प्रमोटर या मालिक) शिवेन्दर सिंह (shivinder Singh) और रेलिगेयर (religare) के भूतपूर्व चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (Ex-CMD) सुनील गोढवानी (Sunil Godhwani) को वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार कर लिया है । आपको बता दें की इन पर लगभग 3500 करोड़ (सांक्यो दाइची के बकाया ) और 740 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है, इस मामले के एक अन्य आरोपी मलविंदर सिंह (Malvinder Singh) (जो की शिवेन्दर सिंह के भाई हैं) की भी तलाश की जा रही है और पुलिस ने उनके लिए लुकआउट नोटिस जारी किया है।
यह एक्शन दिल्ली पुलिस की वित्तीय अपराध शाखा (Economic Offence Wing ) ने लिया है। हाल ही में ऐसे मामलो में पुलिस ने काफी तत्परता दिखते हुए कार्यवाही की है ताकि इस तरह के बड़ी वित्तीय धांधली के आरोपी देश छोड़ कर भाग न सकें ।

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आपको बता दें के शिवेन्दर सिंह fortis healthcare के भी प्रमोटर रह चुके हैं और दोनों भाई (शिवेन्दर और मलविंदर) रैनबैक्सी के उत्तराधिकारी हैं । कुछ साल पहले इन्होने रैनबैक्सी की हिस्सेदारी जापान की फार्मा कंपनी दाईची सांक्यो (daiichi sankyo) को बेच दी थी, बाद में जापानी कंपनी ने सिंगापूर के ट्रिब्यूनल में रैनबैक्सी के खिलाफ केस कर दिया था जिसमे इन दोनों भाइयों पर दाईची सांक्यो को गुमराह कर रैनबैक्सी कंपनी बेचने का आरोप लगाया था और ट्रिब्यूनल ने इन्हे दोषी पाया था।

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दिसंबर में रेलिगेयर फिनवेस्ट लिमिटेड (Religare Finvest limited) ने EOW (वित्तीय अपराध शाखा – economic offence wing) में इन दोनों भाइयों के खिलाफ एक क्रिमनल कंप्लेंट (आपराधिक शिकयत) फाइल की थी।
दोनों भाइयों के बीच में झगड़ा भी तभी शुरू हुआ था जब दोनों के हाथ से फोर्टिस (Fortis) और रेलिगेयर (Religare) का कण्ट्रोल चला गया था। SEBI (सिक्योरिटीज एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया ) ने दोनों भाइयों और उनसे सम्बंधित आठ कंपनियों को फोर्टिस को 403 करोड़ रुपये देने का आदेश दिया था क्योंकि SEBI ने जांच के आधार पर यह पाया था के इन्होने धोखाधड़ी से फंड्स को डाइवर्ट किया और वित्तीय विवरणों (फाइनेंसियल स्टेटमेंट्स ) से छेड़छाड़ की ।
अभी इन आरोपों पर विस्तृत खबरों का इंतज़ार है ।

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