कालाधन रखने वालों की खैर नहीं, स्विस बैंक भारत को देगा जानकारी

कालाधन रखने वालों की अब खैर नहीं क्‍योंकि स्विस बैंक ने भारत सरकार के साथ एक करार किया है जिसके तहत सभी भारतीय खाताधारकों की जानकारी दी जाएगी।

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मोदी सरकार काफी समय से काले धन के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है। 2014 में मोदी ने कहा था की भारत का सारा पैसा जो कि काले धन के रूप में विदेशो में जमा है यदि वो भारत वापस आ जाये तो हर भारतीय के अकाउंट में 15 लाख आ सकते हैं। अब लगता है कि प्रधानमंत्री मोदी का काले धन के खिलाफ लड़ाई सफल होने जा रही है। भारत और स्विट्जरलैंड के बीच एक करार हुआ है जो कि 1 सितंबर से प्रभावी हो चुका है।

इससे कालेधन का पता लगाना आसान हो जाएगा। स्विस बैंकों (Swiss Banks) में जमा भारतीय लोगों के पैसों की जानकारी अब गोपनीय नहीं रहेगी। स्विस बैंक में भारतीयों के अकाउंट की जानकारी अब भारत के इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के साथ साझा करेगी। हाल ही में भारत और स्विट्जरलैंड के बीच एक समझौता हुवा है जिसके अनुसार अब दोनों देश बैंक खातों से जुड़ी सूचनाएं एक दूसरे के साथ साझा करेंगे। इस समझौते कि वजह से ऐसी उम्मीद है कि अब काले धन वाले अकाउंट से जल्द ही पर्दा उठेगा। यदि ऐसा हुआ तो ये प्रधानमंत्री मोदी का सबसे बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि होगी।

सीबीडीटी (CBDT) ने बताया कि स्विट्जरलैंड के एक प्रतिनिधिमंडल 29-30 अगस्त को भारत आया था। इस प्रतिनिधिमंडल की मीटिंग भारत के राजस्व सचिव ए बी पांडेय, बोर्ड के चेयरमैन पी सी मोदी और बोर्ड के सदस्य अखिलेश रंजन के साथ हुई। इस मीटिंग के बाद ये फैसला लिया गया कि दोनों देश अपने-अपने देश के खातधारको के अकाउंट डीटेल्स एक दूसरे के साथ शेयर करेंगे। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल कि मीटिंग के बाद सूचना आदान प्रदान कि गोपनीयता एक सितम्बर से ख़त्‍म हो गई है।

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माना जा रहा है कि साल 1980 से लेकर 2010 के बीच 30 साल के दौरान भारतीयों ने लगभग 17,25,300 करोड़ रुपये से लेकर 34,30,000 करोड़ रुपये के बीच काला धन देश के बाहर भेजा, जिसमे ज्यादातर काला धन स्विस बैंको में जमा है।

सीबीडीटी ने अपने बयान में ये भी कहा कि स्विस बैंक, भारत को 2018 में बंद हुए भारतीय नागरिकों के खातों की भी जानकारी शेयर करेगा। सूचना आदान प्रदान कि ये प्रक्रिया एक सितम्बर से शुरू हो जाएगी।

स्विस बैंक के खातों की जानकारी मिलने के बाद सरकार कई कदम उठाने जा रही है। स्विस बैंक के खाता धारको की सूचनाएं मिलने के बाद इसका मिलान उनके टैक्स रिटर्न से किया जाएगा।

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इनकम टैक्स रिटर्न में यदि कोई फाल्ट है तो उन खाता धारको के खिलाफ लीगल कार्यवाही कि जाएगी। यह समझौता पिछले साल 36 देशों के साथ किया गया था।

ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार फिर से ब्लैकमनी रखने वालों को एक और मौका दे सकती है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने इस साल के बजट में इनकम डिक्लेरेशन स्कीम 2016 को दोबारा खोले जाने का प्रस्ताव दिया है। यह स्कीम उन लोगों के लिए है जिन्होंने अपनी बेहिसाब संपत्ति का खुलासा तो किया था, लेकिन तय तारीख तक टैक्स, सरचार्ज और पेनाल्टी का भुगतान नहीं किया था।