भारतीय रिजर्व बैंक ने सूक्ष्म वित्त संस्थानों के लिए कर्ज(ऋण) देने की सीमा बढ़ाई

भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार 4 अक्टूबर 2019 को सूक्ष्म वित्त संस्थानों के लिए कर्ज देने की सीमा को पिछले एक लाख रुपये से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये कर दिया। रिजर्व बैंक ने यह कदम ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कर्ज की उपलब्धता बेहतर बनाने के लिए उठाया है।

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भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार 4 अक्टूबर 2019 को सूक्ष्म वित्त संस्थानों के लिए कर्ज देने की सीमा को पिछले एक लाख रुपये से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये कर दिया। रिजर्व बैंक ने यह कदम ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कर्ज की उपलब्धता बेहतर बनाने के लिए उठाया है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) या सूक्ष्म वित्त संस्थानों (एमएफआई) से लोन (ऋण) लेने वाले कर्जदारों के लिए, ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र सीमा बढ़ा दी है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पहले यह सीमा एक लाख रुपये थी अब ऐसे से बढ़ाकर 1.60 लाख रुपये कर दी गई है, वही शहरी एवं कस्बाई क्षेत्रों के लिये 1.25 लाख रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दिया गया है। रिजर्व बैंक ने कहा की इसके बारे में जल्दी ही डिटेल इनफार्मेशन प्रदान की जायेगी।

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सूक्षम वित्त इकाइयों(स्माल फाइनेंस यूनिट्स) एमएफआईएन के अध्यक्ष मनोज नाम्बियार ने रिजर्ब बैंक के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि ‘‘यह एक अच्छा फैसला है परिवारों की आय में 2015 से हुए बदलाव को परिलक्षित करता है और इससे सूक्ष्म वित्त संस्थाओं के उपभोक्ता पहले से ज्यादा कर्ज ले सकेंगे।’’ उन्होंने कहा कि सूक्ष्म वित्त संस्थाएं पांच करोड़ से अधिक लोगों की मदद कर वित्तीय समावेश को बढ़ाने में योगदान कर रही हैं।

जैसा की आप जानते है कि रिजर्व बैंक ने 2010 में आंध्र प्रदेश के सूक्ष्म वित्तीय संकट को देखते हुए वाई.एच.मालेगम की अध्यक्षता में एक उप-समिति का गठन किया गया था। उप-समिति को सूक्ष्म बित्तीय क्षेत्रो के मुद्दों तथा चुनौतियों का अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गयी थी।

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उप-समिति की रिपोर्ट और सुझावों के आधार पर ही एनबीएफसी-एमएफआई की एक अलग श्रेणी गठित की गयी और दिसंबर 2011 में विस्तृत रूपरेखा जारी की गयी। भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि वह भारतीय करेंसी यानि रुपये में विदेशी लेन-देन विशेषकर बाह्य वाणिज्यिक कर्ज, व्यापार ऋण तथा निर्यात एवं आयात को बढ़ावा देने के लिए साहसिक कदम उठा रहे है। ऐसा करने से डॉलर से निर्भरता थोड़ी काम हो जाएगी जिससे भारतीय करेंसी को बल मिलेगा।

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विदेशों में हो रहे रुपये के बाजार के संबंध में रिजर्व बैंक ने उषा थोरट समिति की रिपोर्ट के सुझावों का अध्ययन किया और उनमें से कुछ सुझावों अमल भी किया है। इनमें घरेलू बैंकों को किसी भी समय भारत के बहार रह रहे भारतीयों को भारतीय खाते से बाहर घरेलू बिक्री टीम या विदेशी शाखाओं के जरिये विदेशी विनिमय की पेशकश करना शामिल है। रिजर्व बैंक ने ये भी कहा कि समिति के अन्य सुझावों पर विचार किया जा रहा है और आने वाले समय में बताया जायेगा की समिट के किन सुझाबो को स्वीकार किया गया है, इसकी बिस्तृत जानकारी आने वाले समय में साझा की जाएगी।

 

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