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NaMo Temple: तमिलनाडु के एक किसान ने त्रिची में बनाया नमो मंदिर, जाने पूरा सच

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित नमो मंदिर का निर्माण 50 वर्षीय किसान शंकर ने किया है। यह मंदिर तमिलनाडु के त्रिची में है। शंकर जो की तमिलनाडु के एक किसान है वो नरेंद्र मोदी से तब से प्रभावित है, जब वो गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे। शंकर का कहना है की वो गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी द्वारा किये गए विकाश से बहुत प्रभावित हुए।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित नमो मंदिर (NaMo Temple) का निर्माण 50 वर्षीय किसान शंकर (Shankar) ने किया है। यह मंदिर तमिलनाडु के त्रिची में है। शंकर जो की तमिलनाडु के एक किसान है वो नरेंद्र मोदी से तब से प्रभावित है, जब वो गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे। शंकर का कहना है की वो गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी द्वारा किये गए विकाश से बहुत प्रभावित हुए।

तमिलों के लिए किसी के सम्मान में मंदिरों का निर्माण करना कोई नई बात नहीं है। मंदिर बना कर तमिलियन्स उनके प्रति अपने प्रेम और सम्मान को दर्शाते है। पूर्व मुख्यमंत्रियों एमजीआर, जयललिता और करुणानिधि और लोकप्रिय अभिनेताओं के मंदिरों के निर्माण के बाद, एक मंदिर अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए तमिलनाडु के त्रिची जिले के एरगुडी गांव में बनाया गया है।

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किसान शंकर, प्रधानमंत्री मोदी से कुछ ऐसे हुए प्रभावित

शंकर ने बताया की, वो उस समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अनुसरण (फॉलो) करते है जब वो गुजरात के मुख्यमंत्री थे। उन्हें गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास ने काफी प्रभावित किया तब से ही वो मोदी को फॉलो करते है। शंकर ने बताया की जिस समय उन्हें पता चला कि श्री नरेंद्र मोदी जी को भाजपा के पीएम उम्मीदवार के रूप में चुना गया है तो ऐसा सुनते ही बहुत खुश हुआ क्यों केअब मै भी मोदी जी के लिए मतदान कर सकूंगा।

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इतने दिनों में बना नमो मंदिर (NaMo Temple)

शंकर ने कहा कि, नमो मंदिर का निर्माण एक आसान काम नहीं था। उन्हें इस 8 x 8 फिट मंदिर को बनाने के लिए आठ महीने की प्रतीक्षा करनी पड़ी क्योकि हमारी आय का मुख्य स्रोत हमारी 10 एकड़ कृषि भूमि है और मुझे अपने बच्चों, जो कॉलेज में पढ़ रहे है उनकी जरूरतों का भी ध्यान रखना था। इसलिए हमने पहले नींव का निर्माण किया और तीन महीने तक इंतजार किया. बाद में खंभे खड़े किए गए. जिसके बाद टाइलें बिछाई गईं और तब जा कर काम पूरा हुआ।

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आइये जानते है किसान शंकर के बारे में (Know About Kishan Shankar)

जैसा की हमने बताया के शंकर तमिलनाडु के एक मामूली किसान है। शंकर ने बताया की उनका परिवार बहुत गरीब था और उन्होंने अपने माता-पिता को कम उम्र में ही खो दिया। शकर अपनी चौथी कक्षा में थे जब उनके माता – पिता का देहांत हुआ। माता – पिता के देहांत के बात उन्हें अपनी पढाई छोड़नी पड़ी। उन्होंने डेली वेज जॉब कर के कुछ पैसे कमाए। जिससे वो सऊदी काम करने के लिए जा सके। सऊदी में मैं ऊंटों और भेड़ों को पाल रहा था। कई सालों तक वहां काम करने और कुछ पैसे कमाने के बाद मैं अपने मूल भारत वापस आ गया और कुछ जमीन खरीद ली।

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मंदिर में नमो मूर्ति के साथ इनकी तस्वीरें भी लगाई गई है

पीएम मोदी की एक प्रतिमा (मूर्ती ) के अलावा, मंदिर में तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री के कामराज, एमजीआर, जयललिता के चित्र के साथ गृह मंत्री अमित शाह, महात्मा गांधी और वर्तमान तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एडाप्पडी / पलानीस्वामी तश्वीरे भी लगाई हैं।

प्रधानमंत्री योजनाओ से उन्हें क्या लाभ मिले

किसान शंकर से पूछा गया कि क्या उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में मोदी सरकार की किसी भी योजना से कोई लाभ मिला, तो उन्होंने बताया कि पीएम-किसान योजना से उन्हें बहुत लाभ हुआ है जो 2 हेक्टेयर तक भूमि रखने वाले किसानों को हर साल 6,000 रुपये प्रदान करता है। जबकि कांग्रेस ने अपने शासन के दौरान किसानों के लिए विभिन्न योजनाओं की घोषणा तो की थी, लेकिन बहुत से लाभ हम तक नहीं पहुंचे क्योंकि बिचौलियों का एक पूरा सिस्टम होता था। लेकिन अब सभी लाभ सीधे हमारे खाते में पहुंचते हैं।

किशन योजना के अलावा, शंकर का कहना है कि उनके परिवार ने भी स्वच्छ भारत अभियान के तहत अपना पहला शौचालय बनाया है। हमारा परिवार ऐसी स्थिति में था कि हमने हमेशा खाना पकाने के लिए जलाऊ लकड़ी का इस्तेमाल किया था। लेकिन उज्ज्वला योजना ने चीजों को बेहतर बनाया और अब हमारे पास रसोई गैस सिलेंडर और खाना पकाने के स्टोव तक है।

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शंकर के परिवार ने ये सेक्रिफाइसेस किये

शंकर ने एक दुखद घटना का भी जिक्र करते हुए बताया की उनकी बेटी को 2013 मे मेडिकल कॉलेज में प्रवेश नहीं मिला जबकि उसने स्टेट बोर्ड की परीक्षा में 1105/1200 अंक हासिल किये थे। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी ने डॉक्टर बनने के अपने सपने का त्याग करके इंजीनियरिंग की। बाद में जब NEET (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट) मोदी सरकार द्वारा शुरू किया गया था, तो इसने एक ऐसा मापदंड सुनिश्चित किया गया कि बहुत ही सामान्य परिवार के छात्र भी अपनी योग्यता के आधार पर मेडिकल सीट पा सकते हैं। मेरी बेटी डॉक्टर नहीं बन सकी है, पर मै आशा करता हु कि हमारा बेटा जो अभी 12 वीं कक्षा में है, NEET को क्लियर करेगा और मेडिकल कॉलेज में पढाई कर मेरा सपना पूरा करेगा।

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प्रधानमंत्री से ये किया अनुरोध

प्रधान मंत्री के लिए किसी भी विशिष्ट अनुरोध के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने बताया कि यदि नदी को जोड़ने की परियोजना को लागू किया जाए, तो उनके सूखाग्रस्त जिले में और उनके जैसे लाखों किसान परिवार कृषि कर अपना जीवन यापन ख़ुशी खुसी बिता सकते है।

मैं अक्टूबर में मोदी-शी शिखर सम्मेलन के दौरान हमारे पीएम की एक झलक पाने के लिए ममल्लापुरम गया था और दूर से ही उनकी मोटरसाइकिल को देख पाया। लेकिन मैं इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा अवसर मानूंगा अगर मुझे एक बार हमारे पीएम से मिलने का मौका मिल जाए। मैं उनके पैर छू कर आशीर्वाद लेना चाहता हु।

शंकर का कहना है कि नमो मंदिर को देखने के लिए हर दिन कई लोग उनके गांव में आ रहे हैं। वह चाहते है की किसी दिन भाजपा के शीर्ष नेता यहाँ आये और मंदिर में भव्य अनुष्ठान करे। हालाँकि वो जीवन भर इस मंदिर में रोजाना पूजा अर्चना करते रहेंगे।

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Pratima Patel
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