PM मोदी के साथ 70 छात्र लाइव देखेंगे चंद्रयान-2 की लैंडिंग

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ देशभर के लगभग 70 छात्र-छात्रा शनिवार तड़के इसरो से चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में होने वाले चंद्रयान -2 के लैंडर विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग के दृश्य को लाइव देखें।

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चंद्रयान 2 से VikramLander के लिए पहली डे-ऑर्बिट 3 सितंबर, 2019 को 8:50 पर भारतीय समय के अनुसार सफलतापूर्वक की गई। चंद्रयान -2 की दूसरी डी-ऑर्बिटिंग आज सफलतापूर्वक (4 सितंबर, 2019) को ऑनबोर्ड प्रोपल्शन सिस्टम का उपयोग करके, 3:42 पर की गई। पूरा वर्ल्ड 7 सितम्बर को बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहा जब चंद्रयान 2 की चन्द्रमा के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग होगी।

अब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ देशभर के लगभग 70 छात्र-छात्रा शनिवार तड़के इसरो से चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में होने वाले चंद्रयान -2 के लैंडर विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग के दृश्य को लाइव देखें।

बता दें कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा आयोजित प्रत्येक प्रतियोगिता में प्रत्येक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश से सर्वाधिक अंक हासिल करने वाले दो-दो छात्रों को अंतरिक्ष एजेंसी ने चांद की सतह पर ‘चंद्रयान -2’ के लैंडर ‘विक्रम’ की ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ का सीधा नजारा देखने के लिए यहां अपने केंद्र में आमंत्रित किया है।

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रिर्पोट के अनुसार अंतरिक्ष कार्यक्रम के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए इसरो के बेंगलुरु स्थित मुख्यालय ने माईगोव डॉट इन के साथ मिलकर 10 से 25 अगस्त तक एक ऑफ़लाइन प्रतियोगिता आयोजित की थी। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता की अवधि 10 मिनट की थी जिसमें अधिकतम 20 प्रश्नों का उत्तर देना था।

आपको जानकर खुशी होगी कि लैंडर ‘विक्रम’ अपने साथ रोवर ‘प्रज्ञान ’को लेकर 7 सितंबर की रात डेढ़ बजे से ढाई बजे के बीच चांद पर उतरेगा। यदि इसमें सफलता मिलती है तो रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत चांद पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने वाला दुनिया का चौथा और चांद के अब तक अनदेखे दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन जाएगा।

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आपको बता दें कि लैंडर के उतरने के लगभग चार घंटे बाद इसके भीतर से रोवर बाहर निकलेगा और अपने छह पहियों पर चलकर चांद की सतह पर एक चंद्र दिवस (पृथ्वी के 14 दिन के बराबर) तक वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देगा। वहीं, चंद्रयान -2 के ऑर्बिटर का जीवनकाल एक साल का है। इस दौरान वह लगातार चांद की परिक्रमा कर धरती पर बैठे इसरो के वैज्ञानिकों को पृथ्वी के प्राकृतिक उपग्रह (चंद्रमा) के बारे में जानकारी देता रहेगा।

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